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शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए हम सबको मिलकर काम करना पड़ेगा...

मेरी नजर में ग्वालियर शहर जीवंत और समकालीन होना चाहिए जिसमें इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का मिश्रण हो जहां प्रशासन साफ सुथरा हो, भेदभाव ना हो यदि हमें विकास की दौड़ में आगे बढ़ना है तो हमें ज्यादा से ज्यादा होने वाले निर्माण कार्यों पर रोक लगानी होगी तभी हम अपने शहर में कृषि योग्य भूमि को और पर्यावरण को बचा पाएंगे साथ ही ग्वालियर शहर में शहरी यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए उसे व्यवस्थित होना चाहिए इसके लिए हमें नए और बड़े पार्किंग सिस्टम का विकास करना होगा ग्वालियर एक ऐतिहासिक शहर भी रहा है राजा मानसिंह से लेकर सिंधिया राजवंश तक ग्वालियर की हर क्षेत्र में एक अलग की पहचान रही है मेरी नजर में ग्वालियर के शिक्षा और संगीत से जुड़े स्वरूप को हमेशा कायम रखना होगा खेल की दुनिया में भी ग्वालियर का अपनी एक अलग ही पहचान है मेजर ध्यानचंद से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की हांकी अकादमी पूरे विश्व में पहचान रखती है इस खेल भावना को हमें आगे करना होगा साथ ही जो सबसे ज्वलंत मुद्दे हैं पर्यावरण और जल संरक्षण जिसमें हम पुराने कुए और ऐतिहासिक बाबडियो को रिचार्ज कर हम उन्हें फिर से संरक्षित करें ग्वालियर के विकास के लिए जो जगह भंडारे लगते हैं उन पर हमें रोक लगानी होगी क्योंकि भंडारो से बहुत ज्यादा गंदगी शहर में होती है इसके लिए हम एक स्थान निश्चित करना होगा साथ ही पॉलिथीन पर भी रोक लगानी होगी पॉलिथीन से पूरे ग्वालियर की सुंदरता में ग्रहण लगता है हमें पॉलिथीन के लिए अपने नागरिकों को अवेयर करना होगा कि वह निश्चित जगह पर ही पॉलिथीन से संबंधित कचरा डालें जिससे उन्हें कलेक्ट किया जा सके ताकि नाली जम नहीं हो और गाय आदि भी उन्हें खाकर मरे ना इसके साथ ही ग्वालियर के नागरिकों को भी कि वह नियमों को ना तोड़े ट्रैफिक रूल्स का पालन करें और रेली जुलूस शहर की संपत्ति को नुकसान ना पहुंचाएं मेरी नजर में जब हम सरकार से अपना अधिकार मांगते हैं तो हमारे कुछ कर्तव्य भी होते हैं यह ग्वालियर के लोगों को ध्यान रखना होगा तभी हम ग्वालियर के ऐतिहासिक वैभव को लौटा पाएंगे और ग्वालियर एक स्मार्ट सिटी के साथ-साथ शिक्षा, संगीत ,पर्यावरण,इंडस्टी के क्षेत्र में आगे होगा साथी हमें विश्व बंधुत्व की भावना के साथ चलते हुए मानवता के गुणों को अपने अंदर विकास करना होगा राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि मानते हुए हमें स्वार्थ की भावना का त्याग करना होगा जल जंगल जमीन हमारे पालक है उन्हें हमें सुरक्षित करना हीं हो. डा.विनीता जैन (सहायक प्राध्यापक,अर्थशास्त्र विभाग,माधव महाविद्यालय,ग्वालियर)